नियति के बंधन में सब पड़े हैं, तू खुद में मिल और सफ़लता को जड़ता

नियति के बंधन में सब पड़े हैं, तू खुद में मिल और
सफ़लता को जड़ता में बदल दे, इतना ही अब चाहे दिल।

niyati ke bandhan mein sab pade hain, tu khud mein mil aur
safalta ko jadta mein badal de, itana hi ab chahe dil

Everyone is bound by destiny, you find yourself and
turn success into inertia, that’s all you want now.

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